कैसे वो दूसरों का जीवन बचाते हैं अपनी जान पर की परवाह भी नहीं करते ! जो बेचारे जानलेवा मुसीबतों में घिरके केवल मौत का इंतज़ार करते रहते हैं, उनको जो बचाके ले आता है उसे देवतुल्य समझते हैं ! वो अपने और उसके मरने पर उसके अपनों का क्या होगा ये नहीं सोचता ऐसे लोगों को भुलाया नहीं जा सकता ! ये सिपाही होते हैं जो रक्षा करते हैं सरहद हो या देश के भीतर हो वीर कहलाते हैं ! इनके किस्से कहानियों को इसलिए याद करते हैं क्योंकि ये अपने स्वार्थ के लिए नहीं दूसरों की रक्षा के लिए अपना और अपनों का ख्याल तक नहीं रखते ! इनके समर्पण और शहादत को वो ही सबसे ज्यादा समझता है जो इनसे जुड़ा हो और जिनको ये बचाते हैं ! और सबसे बड़ा वज्रपात उन सिपाहियों के परिवार पे होता है जिनपर पूरा परिवार आश्रित होता है अचानक सब कुछ खत्म हो गया प्रतीत होता है भविष्य भी शुन्य नज़र आता है ! क्योंकि बाहरी लोग तो दिलासा देके चले जाते हैं फिर उसके परिवार को क्या मिला इसे नहीं देखते ! रिश्तेदार, यार-दोस्त भी छोड़ देते हैं !आज कुछ ऐसे ही याद कीया !
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