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Saturday, October 2, 2010

Worshiping (Emotional Purity or Customs)

अदब आमोज है , मैखाने का हर जर्रा-जर्रा;
                                    सर झुकाने को ही नहीं कहते सजदा करना. 
इश्क पाबंद ए वफ़ा है नाकि पाबंद ए रसूम;
                                   हजारों तरह से आ जाता है सजदा करना.
(प्रकृति के हर कण में ईश्वर है , सिर्फ सर झुका के ही पूजा नहीं होती, भक्ति में सिर्फ भावना ही अपरिहार्य होती है, बोलकर, पढ़कर, सुनकर, प्रथाओं को निभाकर ही पूजा नहीं की जा सकती . अगर भावना में सच्चाई हो (अकीदत / devotion ) हो तो तुम्हारे हर बात में पूजा (सजदा) होगा )

My wives Birthday 2nd October

Very Happy Birthday to Nandini


:-RAHUL