हर शै में मेरी सूरत पाओगे,
जब मैं न रहूँगा!
ज़र्रों में भी मेरी झलक पाओगे,
जब मैं न रहूँगा!
तनहाइयों में मेरी ही आवाज़ पाओगे,
जब मैं न रहूँगा!
हर राह से मेरी ही पहचान पाओगे,
जब मैं न रहूँगा!
खिलखिलाते फूलों में मेर्री ही हंसी पाओगे,
जब मैं न रहूँगा!
झोकों में हवा के मेरी कमी पाओगे,
जब मैं न रहूँगा!
आइना देख खुद को अधुरा पाओगे,
जब मैं न रहूँगा!
खोकर मुझे जहाँ में मेरा मलाल पाओगे,
जब मैं न रहूँगा!
पंछियों से मेरे ख्वाबों का एहसास पाओगे,
जब मैं न रहूँगा!
ग़ज़लों को मेरी सुन, मेरा पैगाम पाओगे,
जब मैं न रहूँगा!



