उसके बगैर अपने होने का ख्याल ही कैसे करूं,
मेरा तो वजूद ही पूरा होता है, जब वो साथ होता है |
बुतखाना, गिरजा ओ मस्जिद में तुझे ज़माने ने रोके रखा है,
नादानों को होने दे गर वहां तुझे पाने का भरम होता है |
एत्रफ ए मोहब्बत को बयां कैसे करें "खामोश",
कैसे दिखाएं कि अश्कों का सुखा दरिया कैसा होता है |
No comments:
Post a Comment