बहुत छोटी छोटी होती हैं साँसे हमारी, पर ज़िन्दगी लगती नहीं छोटी हमारी!
कभी नहीं बांध पाती हैं साँसों की डोर को जमीं पर मिलके ये दुनिया सारी!
इत्मिनान रखना भी नहीं हो सकता है मुमकिन, गर पता चले हालत हमारी!
सबसे जुदा तजुर्बा ऐ ज़ीस्त है हमारा की दर्दमय होके नहीं जाती मुस्कान हमारी!
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