Just Think & Live

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Friday, March 11, 2011

I Will Be Living

हर शै में मेरी सूरत पाओगे, 
जब मैं न रहूँगा! 
ज़र्रों में भी मेरी झलक पाओगे,
जब मैं न रहूँगा! 
तनहाइयों में मेरी ही आवाज़ पाओगे,
जब मैं न रहूँगा! 
हर राह से मेरी ही पहचान पाओगे,
जब मैं न रहूँगा! 
खिलखिलाते फूलों में मेर्री ही हंसी पाओगे,
जब मैं न रहूँगा! 
झोकों में हवा के मेरी कमी पाओगे,
जब मैं न रहूँगा! 
आइना देख खुद को अधुरा पाओगे,
जब मैं न रहूँगा! 
खोकर मुझे जहाँ में मेरा मलाल पाओगे,
जब मैं न रहूँगा! 
पंछियों से मेरे ख्वाबों का एहसास पाओगे,
जब मैं न रहूँगा! 
ग़ज़लों को मेरी सुन, मेरा पैगाम पाओगे,
जब मैं न रहूँगा!

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